कहे अनकहे किस्से कहानी

यह जो होते हैं किस्से कहानी  कभी सोचा है, तुमने कहां से आते होंगे? क्यों पढने लगते हैं इन्हें हम इस कदर ?इन में खोकर समझने लगते हैं।

जाने अनजाने खुद को इनका हिस्सा ये हमेशा हमारी जिंदगी में शामिल तो रहते हैं, लेकिन इनके भाव अलग होते हैं।

तुम्हें याद है पहली बार अपना स्कूल जाना टीचर का poem, story सुना कर मन बहलाना। धीरे-धीरे जब हम बड़े होते हैं तो यह सब काफी हद तक हम में शामिल हो जाते हैं। हम सीखने लगते हैं। खुद को शब्दों में ढालना और बनाने लगते हैं। खुद भी धीरे-धीरे किस्से और कहानियां, कभी दर्द में डूबे गीत तो कभी गम के समंदर में डूबी शायरियां, बन जाते हैं।

खुद ही इनका किरदार हम और निभाने लगते हैं इन में छुपे कहे अनकहे  भावों को कभी रोकर कभी हंस कर कभी गा कर पढने लगते हैं।

हम मन के भावों को बनाकर किस्से कहानियां।

कहे अनकहे किस्से कहानी

कुछ नया

कुछ ऐसी ही है जिंदगी... 😌 😌 जिंदगी एक ऐसी कहानी है जिसमें किरदार जरूर हम हैं लेकिन वो चलती है किसी और के इशारे से, कई बार सोच लेते हैं हम हमने जो चाहा था वो हो गया। ऐसा लेकिन होता ही नहीं, इसी कशमकश में जिये जाते हैं हम, कभी अपनी तो कभी
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भागती हुई जिंदगी को विराम मिला है... 😌 😌 जीवन को नया आयाम मिला है... यह कोरोना  नहीं इंसान को सबक  सिखाने के लिए... ईश्वर की एक सजा है... काश  लोग होते पहले की तरह... आपस में सबके प्यार  होता... इंसानियत ही सब का आधार  होता... तो वही पहले जैसे व्रत और त्योहार होते... प्रेम
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वो इश्क था या क़र्ज था
वो इश्क था या क़र्ज.. 😍 😘 जाने वो इश्क था या क़र्ज था कोई, वो बढ़ता गया हर पल, मैं कितना भी उतारती  गई। असल क्या था, ये तो पता ही नहीं चला, लेकिन उसके ब्याज की किस्तें थी कई कुछ कसमें, कुछ वादे, कुछ नींदें और यादें थी कई, वो बताता रहा और
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नज़र नहीं आती.. 😌 😌 जो मेरे हैं, वो मेरे होने का दावा तो करते हैं, मगर जाने क्यों उन दावों में सच्चाई नज़र नहीं आती। वो कहते हैं, वो चलते साथ ...सायों की तरह मेरे, मगर जाने क्यों ढूँढे तो, उनकी परछाई नज़र नहीं आती। यूँ तो कहने को चारों ओर एक दरिया दिल
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फिर भी उसी से प्यार करती हूं.. 👩 🙂 मैं जो हूं... वही तलाश करती हूं .. अपने जीवन की हर खुशी निसार करती हूं.. वो चाहे ना चाहे यह मर्जी उसकी... मैं तो फिर भी उसी से प्यार करती हूं । जानती हूं  वह तो एक ख्याल है...मेरा.. फिर भी उसकी राहों में पलकें
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बीस साल बाद ....👩 👨 पार्ट - 4 - आखिरी मुलाकात होटल वापस लौट कर बहुत ही खामोश थी नेहा.. अगली सुबह वापसी की ट्रेन थी। बस वो एक आखरी मुलाकात और एक आखिरी सफर था जब शायद उसे आखिरी बार  देखा था नेहा ने । बैठा रहा था, वह खामोश  रात में उसी जगह
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सच कहूँ .. 😥 😐 बेस्वाद थी वो सारी कॉफियाँ.... जिनको तुम पीते मेरे साथ थे पर क़िस्से दूसरों के सुनाते थे। #किस्से #कॉफी के #लेखनी
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कुछ खास

सिक्के के दो पहलू. 😌 😌 निर्बाध लक्ष्य  हो तो लक्ष्य  कैसा? गर ना विपक्ष हो तो पक्ष कैसा? विषमताएं ना हों तो समता क्या? कुछ अक्षम ना हो तो क्षमता क्या? हर सिक्के के दो पहलू हैं, कुछ कहीं कठिन कुछ कहीं सरल, गर संजीवनी जीवनदायक, तो मारक है हलाहल, गर इनमें से एक
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