तुम बिन जिया जाए ना.. 😧 😟

एक आखिरी बार फिर सीने से लगा लो तुम…

ना फिर कोई शिकायत करेंगे..

बस तेरी खुशी की दुआ  करेंगे..

एक बार फिर से अगर पुकारोगे तुम..

तो कुछ और सुनने की ख्वाहिश ना होगी हमारी ।

ये तो फैसला है किस्मत का..

इसमे खता कहाँ है तुम्हारी,

बहुत ढूंढा  मैंने नाम तेरा

अपने हाथो  की लकीरो  मे,

मगर हर जगह अधूरी ,

मेरी हथेली थी खाली ।

मांगू कैसे खुदा से खुद की खातिर तुझे,

किसी खुशनसीब ने वहाँ पहले ही अर्जी थी ड़ाली।

ऐ यार सुनो ना तुम क्यूं बेवजह खफा हो

एक दिन बहुत याद करोगे

जब हम ना रहेंगे ।

चांद तारों में बेवजह  फिर

हमें ढूंढा करोगे ।

हाँ, मैं वही हूँ

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Author

अनिता रोहल मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।उनके पति और बेटे में ही उनकी पूरी दुनिया बसती है। किताबें, कहानियां पढ़ने की शौकीन अनिता को धीरे-धीरे कविता,कहानियाँ लिखने में भी रुचि हो गयी। आज अपने इसी शौक के चलते वो एक उभरती हुई लेखिका हैं।

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