हाँ.. तुम्हे याद करते हैं.. 😕 😪

तुमसे कह नहीं सकते की तुम्हे याद करते है..
कि मेरे होंठ  तुमसे मिलने की फरियाद  करते है..

तड़प  जो नहीं दिख पाती निगाहों  की कैद में..
कि एक तेरा जिक्र  मेरे लब बेबाक  करते है..

हर कोई बोलता है की महज चंद लम्हे है..
कि हमसे पूछो तुम हिसाब  मेरी एक शाम का..

कि जो पल गुज़र गया बिना तेरे नाम का
उस एक पल से रोज इत्तेफ़ाक़ करते है

रोए तो बहुत है अकेले में

कि वो धोखा  सा खा गए मेरी मुस्कराहट से..

अब उन्हें क्या समझाते की क्या गुज़र गया..

 अब तो आईने से भी आजकल मजाक करते है..
तुमसे कह नहीं सकते की तुम्हे याद करते है

हाँ, मैं वही हूँ

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Author

Btech करके टेक्नोलॉजी से जुड़ी काकुल श्रीवास्तव ने राज्य स्तर के डिबेट में भी भाग लिया है। नृत्य,गीत-संगीत और चित्रकारी में रुचि रखने वाली काकुल को नॉवेल पढ़ना बेहद पसंद है। बचपन से ही साहित्य में रुचि के कारण इन्हें लिखने का शौक हो गया। जीवन के नए पड़ाव में प्रवेश करने वाली काकुल को उनका लेखन प्रेरणा देता है जिसे वो शब्दों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाती हैं।

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