इश्क़.. 😐 🙃

क़द्र न थी उन्हें मेरे इश्क़ की
हालत हाथो से निकल गए
सब्र  का बांध जो टूटा फिर
सैलाब आँखों  से निकल गए

कि कफ़न चढ़ा था मेरे इश्क़ पे
कि गम था चेहरा  छुपाये हुए
हमने खुद ही दिल को दफ़न किया
वो खड़े रहे नजरे झुकाये हुए

हाँ, मैं वही हूँ

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Author

Btech करके टेक्नोलॉजी से जुड़ी काकुल श्रीवास्तव ने राज्य स्तर के डिबेट में भी भाग लिया है। नृत्य,गीत-संगीत और चित्रकारी में रुचि रखने वाली काकुल को नॉवेल पढ़ना बेहद पसंद है। बचपन से ही साहित्य में रुचि के कारण इन्हें लिखने का शौक हो गया। जीवन के नए पड़ाव में प्रवेश करने वाली काकुल को उनका लेखन प्रेरणा देता है जिसे वो शब्दों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाती हैं।

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