ये जो जिंदगी है.. 🙂 🙃

आंख मिचौली  करती है ।
कभी ना रूबरू मिलती है ।
मैं भागती हूं रोज इसके पीछे
ये सौ कदम आगे चलती है।

कभी छांव , तो कभी धूप सी जलती है ।
हजार तमन्नाएं  मेरी, इसे देखकर मचलती हैं ।
ये जो जिंदगी  है ।
कभी पानी सी तो कभी रेत सी
हाथों से फिसलती  है।
कभी छोड़ देती है हाथ तो,
कभी बनकर साया साथ मेरे चलती है।
ये जो जिंदगी है ।

कहे अनकहे - Kahe Ankahe

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Author

अनिता रोहल मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।उनके पति और बेटे में ही उनकी पूरी दुनिया बसती है। किताबें, कहानियां पढ़ने की शौकीन अनिता को धीरे-धीरे कविता,कहानियाँ लिखने में भी रुचि हो गयी। आज अपने इसी शौक के चलते वो एक उभरती हुई लेखिका हैं।

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