फूल को पत्थर होते देखा है .. 🙂 🙃

क्या क्या बताएं
हमने क्या क्या देखा है
एक मासूम  से दिल को
रोज पत्थरों से टकराते देखा है

हर बार चोट खाकर भी
मुस्कुराते हुए देखा है
हर पत्थर की सलामती की
दुआ करते देखा है

शिकायत  करने का तो ख्याल
कभी आया ही नहीं
बस हर लम्हा सजदे में
सर झुकते हुए देखा है

होते होंगे किसी के महबूब
फूलों से दिल के
हमने तो हर फूल को
पत्थर होते देखा है

कहे अनकहे - Kahe Ankahe

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Author

अनिता रोहल मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।उनके पति और बेटे में ही उनकी पूरी दुनिया बसती है। किताबें, कहानियां पढ़ने की शौकीन अनिता को धीरे-धीरे कविता,कहानियाँ लिखने में भी रुचि हो गयी। आज अपने इसी शौक के चलते वो एक उभरती हुई लेखिका हैं।

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