जाने कितने ही लम्हें.. 🙆 🙎
सोचकर देखें मैंने जाने कितने ही लम्हें
मगर याद नहीं आए वो पल कि…..
कब मैं सुकून से सोई थी।
आंखें तो भीग जाती हैं यूं भी अक्सर
मगर याद नहीं है वो खुशी
जिसमें मैं….. मुस्कुरा के रोई थी

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