दिसंबर की वो सर्द सी दोपहर, क्या याद है आपको?

वो घबराहट, वो खामोशी, वो प्यार, जैसे सब कुछ एक ही पल में सिमट सा गया था।

जब आपकी नर्म हथेली को मेरे हाथ ने छुआ था।

एक पल को सांसें जैसे थम सी गई थी, ऐसा अहसास कहां पहले कभी हुआ था। धड़कनों ने जैसे सांसों को काबू किया हो, मेरी रूह ने ऐसे आपको महसूस किया था।

फिर आपका चूम लेना, जैसे कयामत सा हुआ था। बहुत खूबसूरत अहसास था वो,

जब आपने मेरा हाथ अपने हाथ में पकड़ा हुआ था।

…….ये कोई गलती नहीं थी। हाँ दो रूहों को प्यार हुआ था🥰🥰

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Author

अनिता रोहल मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं।उनके पति और बेटे में ही उनकी पूरी दुनिया बसती है। किताबें, कहानियां पढ़ने की शौकीन अनिता को धीरे-धीरे कविता,कहानियाँ लिखने में भी रुचि हो गयी। आज अपने इसी शौक के चलते वो एक उभरती हुई लेखिका हैं।

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